मुश्किल

मुश्किल नहीं होता चुप रहना
सब कुछ सहना, कुछ न कहना
अपने सपनों को, आशाओं को
अपने ही पैरों तले रौंद देना

मुश्किल नहीं होता आंसू पीना
तिल तिल मरना, घुट घुट जीना
रोज़ सुबह उठना काम पे जाना
शाम को लौटना, सो जाना

मुश्किल नहीं होता भीड़ में खोना
सबके बीच भी तन्हा होना
उलझाना दुनिया में खुद को
फिर खुद को ही खोजते रहना

मुश्किल नहीं होता इश्क़ करना
किसी को दिलो जां से चाहना
उसके लिए सबकुछ लुटा के
खुद को और तन्हा पाना

मुश्किल नहीं होता…

यूं तो कुछ भी
मुश्किल नहीं होता

Subscribe to Blog via Email

Receive notifications of new posts by email.

Leave a comment

%d bloggers like this: