बादल

सुबह सवेरे घिर आए बादल
जाने कहां से फिर आए बादल

आज फिर सोच रहा था तुमको
आज आंख में फिर आए बादल

सारे ज़माने का सफर कर के
जैसे घर मुहाजिर आए बादल

धूप से जलने लगा था बदन
मुझे बुझाने खातिर आए बादल

तरसती नजरों ने आस छोड़ दी
बाद उसके नज़र आए बादल

देखे

रंग दुनिया के बदलते देखे
दिल पत्थर पिघलते देखे

रौशनी की तलाश में हमने
घर कितने ही जलते देखे

आजमाते दुश्मनों को क्या
दोस्त सारे बदलते देखे

ख़्वाब जितने देखे हमने
पा-ए-वक्त कुचलते देखे

तरक्की के भूखे लोगों के
पांव यहां फिसलते देखे

दिन भर रहे चमकते जो
सूरज वो भी ढलते देखे

कल शाम

कल शाम आंखों को मैंने सेहरा किया
औ’ उफ़ुक़ पे खुद को डूबते देखा किया

पहले बनाया हमने साए को हमसफ़र
फिर उम्र भर उस साए का पीछा किया

आज भी मसरूफ रहे कार-ए-जहाॅं में
यानी आज का दिन भी ज़ाया किया

इक नाकाम आशिक़ का दिल हो जैसे
सांझ का सूरज कुछ यूं दहका किया

किस्से तुम्हारे फिर से सुनाए यारों को
फिर दिल के ज़ख्मों को ताज़ा किया

आंखों को ज़िद्द थी उस मंज़र की सो मैं
हर महफ़िल हर जा उसे खोजा किया

शाम के साथ

रंग कितने बिखर जाते हैं शाम के साथ
दर्द भूले हुए याद आते हैं शाम के साथ

दिन भर साथ रहती है इक झूठी हंसी
सच्चे हैं गम चले आते हैं शाम के साथ

कोई साथ चलेगा भी कितनी दूर भला
हम भी ज़रा सुस्ताते हैं शाम के साथ

शमा उम्मीदों की बुझने लगती है औ’ हम
ओढ़ उदासी सो जाते हैं शाम के साथ

दिन भर जिनको तवज्जो नहीं मिलती
वही चिराग काम आते हैं शाम के साथ

तू भी याद आता है बेइंतिहां हमें जब
कोई ग़ज़ल गुनगुनाते हैं शाम के साथ

महक उठता है ये घर लोबान की तरह
जिस रोज़ दोस्त आते हैं शाम के साथ

जिए जा रहे हैं

तेरे सच्चे झूठे वादों पे जिए जा रहे हैं
तू ज़हर है जिंदगी, हम पिए जा रहे हैं

तुम्हें अपने आगे दिखता नहीं कोई
हम इक जहाॅं कांधे पे लिए जा रहे हैं

हाकिम-ए-शहर को है डर सच्चाई से
सारे आलिम लब अपने सिए जा रहे हैं

यूं तो हाथ उठाने की भी नहीं क़ुव्वत
जीना है जरूरी, सो हम जिए जा रहे हैं

अपना साया भी आता नहीं नज़र हमें
सारी दुनिया को रौशन किए जा रहे हैं

आजा कि शाम से फिर तेरे इंतज़ार में
नीम-कश बादा-ए-ग़म पिए जा रहे है

मेरे शहर के लोग

मिट्टी के घरौंदे बनाते मेरे शहर के लोग
बारिश में हैं पछताते मेरे शहर के लोग

करने को कोई काम नहीं, बैठे हैं खाली
बातें बड़ी बड़ी बनाते मेरे शहर के लोग

नहीं है मालूम अपने पड़ोसियों के नाम
दुनिया को अपना बताते मेरे शहर के लोग

सोशल मीडिया पे देते सबको बड़ा ज्ञान
काम किसी के ना आते मेरे शहर के लोग

ये मत खाओ, वो मत पहनो, इसे ना देखो
हर जगह पाबंदी लगाते मेरे शहर के लोग

माथे हाथों की रेखाओं पे डालते दोष सारे
विश्वगुरु ज्ञानी कहलाते मेरे शहर के लोग

शहर का शहर ही सोया हुआ है

शहर का शहर ही सोया हुआ है
जैसे इसे सुबह से खतरा सा है

मैं एहतराम तो कर लूं उसका
वो किस की धुन में खोया है

तेरी याद के पंछी उतरे छत पर
जाने शाम का इरादा क्या है

कहने को अपना है सारा जहां
देखिए गौर से अपना क्या है

उम्र भर दौड़ते रहे और पाया
खोई मंज़िल, रास्ता, कारवां है

आ के लग जा गले ऐ अज़ल
दिल मेरा अब डूबता जा रहा है

दम तोड़ती है हर ख्वाहिश मेरी
ये किस मोड़ पर मुझे तू मिला है

समंदर

है मेरे अंदर जो ये अथाह समंदर
कर देगा सब कुछ तबाह समंदर

तेरी आंखों में जो दरिया हैं तो हों
मेरी सांसों का है मल्लाह समंदर

उतरो जो इसमें तो देख कर उतरो
कर दे ना तुमको गुमराह समंदर

मैं ढूंढ़ता फिरता हूं रौशनी के कतरे
किस्मत में है मेरी सियाह समंदर

भाग रहा हूं मैं हार के इस जहां से
शायद मुझे देगा अब पनाह समंदर

इक सदी से मैं खुद से जूझ रहा हूं
नाकामियों का मेरी गवाह समंदर

 

दोस्तों अलविदा

अब जाते हैं, खुश रहना, दोस्तों अलविदा
तुम अपना ख्याल रखना, दोस्तों अलविदा

तुम चाहो ये जहां, सो तुम्हें ये जहां मुबारक
हमारी चाहत जग दूजा, दोस्तों अलविदा

चार दिन जो साथ गुज़रे याद रहेंगे बरसों
था शायद वक्त बस इतना, दोस्तों अलविदा

उम्र भर बने रहे मील का पत्थर, इसके आगे
राह तुम्हारी कौन तकता, दोस्तों अलविदा

जीते जी दुनिया को हमने सिर्फ़ तबस्सुम बांटे
याद हमारी बटोर रखना, दोस्तों अलविदा

 

हम रोएंगे नहीं

कोई छोड़ के जाएगा घर, हम रोएंगे नहीं
बात रोने की तो है मगर हम रोएंगे नहीं

पांव में छाले, राह में जंगल, साथ कोई नहीं
माना कठिन है ये सफ़र, हम रोएंगे नहीं

तूफ़ानों ने पहले भी रोका है रास्ता अपना
खोई है आज फिर डगर, हम रोएंगे नहीं

तेरी खातिर अपनी खुशियां बेच दीं और तू
गैर के पहलू में आया नज़र, हम रोएंगे नहीं

हमें पता है पत्थर को भी काटता है पानी
कहीं वो जाए ना बिखर, हम रोएंगे नहीं

अब तो लहू नहीं बेहिसी दौड़ती है बदन में
आए अब कैसी भी खबर, हम रोएंगे नहीं

हमें खौफ नहीं संजीदगी से, यकीं मानो
हमें बस इस बात का डर, हम रोएंगे नहीं

हमारे हौसले आज़माता आया है ज़माना
आ देख ले तू भी सितमगर, हम रोएंगे नहीं